पता नहीं ऐसा क्यों होता है की हम भरे बाजार में अपने को अकेला पाते है.. दिल से निकले शब्द दिमाग से होके जब निकलते है तो "रंग" क्यों बदलते है......
Monday, October 05, 2009
जख्म क्या बोलना, क्या कहना, क्या सुनाना आपकी मर्जी.... क्योकि जबान आपकी और आपकी मर्जीभी लेकिन कभी सोचके तो देखो की आपके कहे हुए शब्दोने जख्म तो नही बनाए.......