Sunday, December 27, 2009

पता नहीं ऐसा क्यों होता है
की हम भरे बाजार में अपने को अकेला पाते है..
दिल से निकले शब्द दिमाग से होके जब निकलते है तो "रंग" क्यों बदलते है......

Monday, October 05, 2009

जख्म
क्या बोलना, क्या कहना, क्या सुनाना आपकी मर्जी.... क्योकि जबान आपकी और आपकी मर्जीभी
लेकिन कभी सोचके तो देखो की आपके कहे हुए शब्दोने जख्म तो नही बनाए.......